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धनतेरस 2026
Dhanteras 2026
नई दिल्ली · IST
धनतेरस 2026 में 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को है।
- धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:02 – शाम 7:58
- प्रदोष काल: शाम 5:32 – रात 8:09
- वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 6:02 – शाम 7:58
- कृष्ण पक्ष त्रयोदशी: सुबह 10:31 से सुबह 10:48 (7 नवंबर) तक
क्या है और कैसे मनाएं
धनतेरस, दीपावली का पहला दिन, धन्वंतरि और माँ लक्ष्मी को समर्पित है। लोग नए बर्तन, सोना-चांदी खरीदते हैं और संध्या को यम दीपक जलाते हैं; पूजन प्रदोष काल में, संभव हो तो स्थिर वृषभ लग्न में, किया जाता है।
तिथि का नियम
आश्विन (अमांत) कृष्ण त्रयोदशी: प्रदोष व्यापिनी तिथि.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है।
धनतेरस 2026 का पूजा मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली के लिए - धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:02 – शाम 7:58; प्रदोष काल: शाम 5:32 – रात 8:09; वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 6:02 – शाम 7:58। समय शहर के अनुसार कुछ मिनट बदलता है; अपने शहर के लिए पंचांग देखें।
धनतेरस 2026 6 नवंबर को ही क्यों है?
तिथि का नियम: आश्विन (अमांत) कृष्ण त्रयोदशी: प्रदोष व्यापिनी तिथि। 2026 में यह 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को पड़ता है (नई दिल्ली)।
समय शहर के अनुसार बदलते हैं। यहां दिए सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय पर आधारित हैं; दूसरे शहर में कुछ मिनट और कभी-कभी तिथि भी बदल सकती है। तिथियां द्रिक पंचांग की स्मार्त (सामान्य) गणना से मेल खाती हैं। अपने शहर के लिए पंचांग देखें।
2026 के प्रमुख त्योहार
- सकट चौथ
- लोहड़ी
- मकर संक्रांति
- मौनी अमावस्या
- वसंत पंचमी
- महाशिवरात्रि
- होलिका दहन
- शीतला अष्टमी (बसौड़ा)
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ
- गुड़ी पड़वा / उगादी
- गणगौर
- राम नवमी
- हनुमान जयंती
- अक्षय तृतीया
- वट सावित्री व्रत
- गंगा दशहरा
- वट पूर्णिमा व्रत
- गुरु पूर्णिमा
- हरियाली तीज
- नाग पंचमी
- रक्षा बंधन
- कजरी तीज
- हल षष्ठी (ललही छठ)
- कृष्ण जन्माष्टमी
- गणेश चतुर्थी
- हरतालिका तीज
- ऋषि पंचमी
- अनंत चतुर्दशी
- पितृ पक्ष आरंभ (प्रतिपदा श्राद्ध)
- जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया)
- सर्व पितृ अमावस्या (महालया)
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ
- दशहरा (विजयादशमी)
- शरद पूर्णिमा
- करवा चौथ
- अहोई अष्टमी
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा)
- नरक चतुर्दशी (रूप चौदस)
- गोवर्धन पूजा
- भाई दूज
- छठ पूजा
- देवउठनी एकादशी
- तुलसी विवाह
- देव दीपावली
- कार्तिक पूर्णिमा