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देव दीपावली 2027
Dev Deepawali 2027
नई दिल्ली · IST
देव दीपावली 2027 में 13 नवंबर 2027, शनिवार को है।
- प्रदोष काल: शाम 5:28 – रात 8:07
- शुक्ल पक्ष पूर्णिमा: सुबह 9:55 से सुबह 8:55 (14 नवंबर) तक
क्या है और कैसे मनाएं
देव दीपावली, 'देवताओं की दिवाली', कार्तिक पूर्णिमा की संध्या को, विशेषकर वाराणसी के घाटों पर लाखों दीयों के साथ मनाई जाती है। यह शिव की त्रिपुरासुर पर विजय का पर्व है; प्रदोष काल में गंगा को दीपदान किया जाता है।
तिथि का नियम
कार्तिक (अमांत) शुक्ल पूर्णिमा: प्रदोष व्यापिनी तिथि.
द्रिक पंचांग देव दीपावली वाराणसी के लिए देता है; यहां तिथि उसी नियम (प्रदोष में पूर्णिमा) से है और दिया गया प्रदोष काल नई दिल्ली का है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
देव दीपावली 2027 कब है?
देव दीपावली 2027 शनिवार, 13 नवंबर 2027 को है।
देव दीपावली 2027 का पूजा मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली के लिए - प्रदोष काल: शाम 5:28 – रात 8:07। समय शहर के अनुसार कुछ मिनट बदलता है; अपने शहर के लिए पंचांग देखें।
देव दीपावली 2027 13 नवंबर को ही क्यों है?
तिथि का नियम: कार्तिक (अमांत) शुक्ल पूर्णिमा: प्रदोष व्यापिनी तिथि। 2027 में यह 13 नवंबर 2027, शनिवार को पड़ता है (नई दिल्ली)।
समय शहर के अनुसार बदलते हैं। यहां दिए सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय पर आधारित हैं; दूसरे शहर में कुछ मिनट और कभी-कभी तिथि भी बदल सकती है। तिथियां द्रिक पंचांग की स्मार्त (सामान्य) गणना से मेल खाती हैं। अपने शहर के लिए पंचांग देखें।
2027 के प्रमुख त्योहार
- लोहड़ी
- मकर संक्रांति
- सकट चौथ
- मौनी अमावस्या
- वसंत पंचमी
- महाशिवरात्रि
- होलिका दहन
- शीतला अष्टमी (बसौड़ा)
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ
- गुड़ी पड़वा / उगादी
- गणगौर
- राम नवमी
- हनुमान जयंती
- अक्षय तृतीया
- वट सावित्री व्रत
- गंगा दशहरा
- वट पूर्णिमा व्रत
- गुरु पूर्णिमा
- हरियाली तीज
- नाग पंचमी
- रक्षा बंधन
- कजरी तीज
- हल षष्ठी (ललही छठ)
- कृष्ण जन्माष्टमी
- हरतालिका तीज
- गणेश चतुर्थी
- ऋषि पंचमी
- अनंत चतुर्दशी
- पितृ पक्ष आरंभ (प्रतिपदा श्राद्ध)
- जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया)
- सर्व पितृ अमावस्या (महालया)
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ
- दशहरा (विजयादशमी)
- शरद पूर्णिमा
- करवा चौथ
- अहोई अष्टमी
- धनतेरस
- नरक चतुर्दशी (रूप चौदस)
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा)
- गोवर्धन पूजा
- भाई दूज
- छठ पूजा
- देवउठनी एकादशी
- तुलसी विवाह
- कार्तिक पूर्णिमा