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धनतेरस 2027
Dhanteras 2027
नई दिल्ली · IST
धनतेरस 2027 में 27 अक्टूबर 2027, बुधवार को है।
- धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:43 – रात 8:14
- प्रदोष काल: शाम 5:40 – रात 8:14
- वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 6:43 – रात 8:38
- कृष्ण पक्ष त्रयोदशी: रात 1:04 से रात 10:50 तक
क्या है और कैसे मनाएं
धनतेरस, दीपावली का पहला दिन, धन्वंतरि और माँ लक्ष्मी को समर्पित है। लोग नए बर्तन, सोना-चांदी खरीदते हैं और संध्या को यम दीपक जलाते हैं; पूजन प्रदोष काल में, संभव हो तो स्थिर वृषभ लग्न में, किया जाता है।
तिथि का नियम
आश्विन (अमांत) कृष्ण त्रयोदशी: प्रदोष व्यापिनी तिथि.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धनतेरस 2027 कब है?
धनतेरस 2027 बुधवार, 27 अक्टूबर 2027 को है।
धनतेरस 2027 का पूजा मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली के लिए - धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:43 – रात 8:14; प्रदोष काल: शाम 5:40 – रात 8:14; वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 6:43 – रात 8:38। समय शहर के अनुसार कुछ मिनट बदलता है; अपने शहर के लिए पंचांग देखें।
धनतेरस 2027 27 अक्टूबर को ही क्यों है?
तिथि का नियम: आश्विन (अमांत) कृष्ण त्रयोदशी: प्रदोष व्यापिनी तिथि। 2027 में यह 27 अक्टूबर 2027, बुधवार को पड़ता है (नई दिल्ली)।
समय शहर के अनुसार बदलते हैं। यहां दिए सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय पर आधारित हैं; दूसरे शहर में कुछ मिनट और कभी-कभी तिथि भी बदल सकती है। तिथियां द्रिक पंचांग की स्मार्त (सामान्य) गणना से मेल खाती हैं। अपने शहर के लिए पंचांग देखें।
2027 के प्रमुख त्योहार
- लोहड़ी
- मकर संक्रांति
- सकट चौथ
- मौनी अमावस्या
- वसंत पंचमी
- महाशिवरात्रि
- होलिका दहन
- शीतला अष्टमी (बसौड़ा)
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ
- गुड़ी पड़वा / उगादी
- गणगौर
- राम नवमी
- हनुमान जयंती
- अक्षय तृतीया
- वट सावित्री व्रत
- गंगा दशहरा
- वट पूर्णिमा व्रत
- गुरु पूर्णिमा
- हरियाली तीज
- नाग पंचमी
- रक्षा बंधन
- कजरी तीज
- हल षष्ठी (ललही छठ)
- कृष्ण जन्माष्टमी
- हरतालिका तीज
- गणेश चतुर्थी
- ऋषि पंचमी
- अनंत चतुर्दशी
- पितृ पक्ष आरंभ (प्रतिपदा श्राद्ध)
- जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया)
- सर्व पितृ अमावस्या (महालया)
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ
- दशहरा (विजयादशमी)
- शरद पूर्णिमा
- करवा चौथ
- अहोई अष्टमी
- नरक चतुर्दशी (रूप चौदस)
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा)
- गोवर्धन पूजा
- भाई दूज
- छठ पूजा
- देवउठनी एकादशी
- तुलसी विवाह
- देव दीपावली
- कार्तिक पूर्णिमा