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नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) 2027
Narak Chaturdashi (Roop Chaudas) 2027
नई दिल्ली · IST
नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) 2027 में 28 अक्टूबर 2027, गुरुवार को है।
- अभ्यंग स्नान (चंद्रोदय से सूर्योदय): सुबह 5:06 – सुबह 6:29
- कृष्ण पक्ष चतुर्दशी: रात 10:50 (27 अक्टूबर) से रात 8:48 तक
क्या है और कैसे मनाएं
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (पूर्णिमांत), नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय की स्मृति है। सूर्योदय से पहले, चंद्रोदय के बाद, उबटन व तेल से अभ्यंग स्नान किया जाता है और संध्या को यम का दीपक जलाया जाता है।
तिथि का नियम
आश्विन (अमांत) कृष्ण चतुर्दशी: सूर्योदय के समय की तिथि.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) 2027 कब है?
नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) 2027 गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027 को है।
नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) 2027 का पूजा मुहूर्त क्या है?
नई दिल्ली के लिए - अभ्यंग स्नान (चंद्रोदय से सूर्योदय): सुबह 5:06 – सुबह 6:29। समय शहर के अनुसार कुछ मिनट बदलता है; अपने शहर के लिए पंचांग देखें।
नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) 2027 28 अक्टूबर को ही क्यों है?
तिथि का नियम: आश्विन (अमांत) कृष्ण चतुर्दशी: सूर्योदय के समय की तिथि। 2027 में यह 28 अक्टूबर 2027, गुरुवार को पड़ता है (नई दिल्ली)।
समय शहर के अनुसार बदलते हैं। यहां दिए सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय पर आधारित हैं; दूसरे शहर में कुछ मिनट और कभी-कभी तिथि भी बदल सकती है। तिथियां द्रिक पंचांग की स्मार्त (सामान्य) गणना से मेल खाती हैं। अपने शहर के लिए पंचांग देखें।
2027 के प्रमुख त्योहार
- लोहड़ी
- मकर संक्रांति
- सकट चौथ
- मौनी अमावस्या
- वसंत पंचमी
- महाशिवरात्रि
- होलिका दहन
- शीतला अष्टमी (बसौड़ा)
- चैत्र नवरात्रि प्रारंभ
- गुड़ी पड़वा / उगादी
- गणगौर
- राम नवमी
- हनुमान जयंती
- अक्षय तृतीया
- वट सावित्री व्रत
- गंगा दशहरा
- वट पूर्णिमा व्रत
- गुरु पूर्णिमा
- हरियाली तीज
- नाग पंचमी
- रक्षा बंधन
- कजरी तीज
- हल षष्ठी (ललही छठ)
- कृष्ण जन्माष्टमी
- हरतालिका तीज
- गणेश चतुर्थी
- ऋषि पंचमी
- अनंत चतुर्दशी
- पितृ पक्ष आरंभ (प्रतिपदा श्राद्ध)
- जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया)
- सर्व पितृ अमावस्या (महालया)
- शारदीय नवरात्रि प्रारंभ
- दशहरा (विजयादशमी)
- शरद पूर्णिमा
- करवा चौथ
- अहोई अष्टमी
- धनतेरस
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा)
- गोवर्धन पूजा
- भाई दूज
- छठ पूजा
- देवउठनी एकादशी
- तुलसी विवाह
- देव दीपावली
- कार्तिक पूर्णिमा