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जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) 2027

Jivitputrika Vrat (Jitiya) 2027

नई दिल्ली · IST

जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) 2027 में 23 सितंबर 2027, गुरुवार को है।

क्या है और कैसे मनाएं

जीवित्पुत्रिका (जितिया, जिउतिया) व्रत बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में माताएं संतान की लंबी आयु और कुशलता के लिए आश्विन कृष्ण अष्टमी (पूर्णिमांत) को रखती हैं। एक दिन पहले नहाय-खाय होता है; व्रत निर्जला होता है, दिन-रात जल भी ग्रहण नहीं किया जाता, जीमूतवाहन की पूजा व जितिया कथा होती है। पारण अगली सुबह किया जाता है।

तिथि का नियम

भाद्रपद (अमांत) कृष्ण अष्टमी: मध्याह्न व्यापिनी तिथि.

तिथि द्रिक पंचांग के अनुसार है (मध्याह्न में अष्टमी; सूर्योदय पर थोड़ी देर ही हो, जैसे 2023 में, तो पिछला दिन)। नहाय-खाय एक दिन पहले और पारण अगली सुबह होता है; क्षेत्रीय पंचांगों (जैसे मिथिला) में कभी-कभी एक दिन का अंतर होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) 2027 कब है?

जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) 2027 गुरुवार, 23 सितंबर 2027 को है।

जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) 2027 23 सितंबर को ही क्यों है?

तिथि का नियम: भाद्रपद (अमांत) कृष्ण अष्टमी: मध्याह्न व्यापिनी तिथि। 2027 में यह 23 सितंबर 2027, गुरुवार को पड़ता है (नई दिल्ली)।

समय शहर के अनुसार बदलते हैं। यहां दिए सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय पर आधारित हैं; दूसरे शहर में कुछ मिनट और कभी-कभी तिथि भी बदल सकती है। तिथियां द्रिक पंचांग की स्मार्त (सामान्य) गणना से मेल खाती हैं। अपने शहर के लिए पंचांग देखें।

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