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प्रदोष व्रत 2026: सभी तिथियां और प्रदोष पूजा का समय

Pradosh Vrat 2026

नई दिल्ली · IST

प्रदोष व्रत की अगली तिथि 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को है (कृष्ण पक्ष त्रयोदशी: रात 11:17 (7 अक्टूबर) से रात 10:16 तक; प्रदोष पूजा: शाम 5:59 – रात 8:27)।

प्रदोष व्रत 2026: सभी तिथियां

माह अमांत हैं (माह अमावस्या पर पूरा होता है, जैसा दक्षिण व पश्चिम भारत में)। उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में कृष्ण पक्ष का नाम एक माह आगे का होता है।

दिनांकहिंदू माहतिथिप्रदोष पूजा
1 जनवरी, गुरुवारपौषशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: रात 1:48 से रात 10:22 तकशाम 5:35 – रात 8:19
16 जनवरी, शुक्रवारपौषकृष्ण पक्ष त्रयोदशी: रात 8:17 (15 जनवरी) से रात 10:22 तकशाम 5:47 – रात 8:28
30 जनवरी, शुक्रवारमाघशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: सुबह 11:09 से सुबह 8:26 (31 जनवरी) तकशाम 5:58 – रात 8:37
14 फ़रवरी, शनिवारशनि प्रदोषमाघकृष्ण पक्ष त्रयोदशी: शाम 4:02 से शाम 5:05 (15 फ़रवरी) तकशाम 6:10 – रात 8:44
1 मार्च, रविवारफाल्गुनशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: रात 8:43 (28 फ़रवरी) से शाम 7:09 तकशाम 6:21 – शाम 7:09
16 मार्च, सोमवारसोम प्रदोषफाल्गुनकृष्ण पक्ष त्रयोदशी: सुबह 9:41 से सुबह 9:23 (17 मार्च) तकशाम 6:30 – रात 8:53
30 मार्च, सोमवारसोम प्रदोषचैत्रशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: सुबह 7:10 से सुबह 6:56 (31 मार्च) तकशाम 6:38 – रात 8:56
15 अप्रैल, बुधवारचैत्रकृष्ण पक्ष त्रयोदशी: रात 12:12 से रात 10:31 तकशाम 6:47 – रात 9:00
28 अप्रैल, मंगलवारभौम प्रदोषवैशाखशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: शाम 6:52 से शाम 7:52 (29 अप्रैल) तकशाम 6:54 – रात 9:04
14 मई, गुरुवारवैशाखकृष्ण पक्ष त्रयोदशी: सुबह 11:21 से सुबह 8:31 (15 मई) तकशाम 7:04 – रात 9:09
28 मई, गुरुवारअधिक ज्येष्ठशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: सुबह 7:57 से सुबह 9:51 (29 मई) तकशाम 7:12 – रात 9:14
12 जून, शुक्रवारअधिक ज्येष्ठकृष्ण पक्ष त्रयोदशी: शाम 7:37 से शाम 4:08 (13 जून) तकशाम 7:37 – रात 9:20
27 जून, शनिवारशनि प्रदोषज्येष्ठशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: रात 10:22 (26 जून) से रात 12:43 (28 जून) तकशाम 7:23 – रात 9:23
12 जुलाई, रविवारज्येष्ठकृष्ण पक्ष त्रयोदशी: रात 2:04 से रात 10:30 तकशाम 7:21 – रात 9:23
26 जुलाई, रविवारआषाढ़शुक्ल पक्ष त्रयोदशी: दोपहर 1:58 से शाम 4:15 (27 जुलाई) तकशाम 7:16 – रात 9:20
10 अगस्त, सोमवारसोम प्रदोषआषाढ़कृष्ण पक्ष त्रयोदशी: सुबह 8:01 से सुबह 4:54 (11 अगस्त) तकशाम 7:05 – रात 9:13
25 अगस्त, मंगलवारभौम प्रदोषश्रावणशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: सुबह 6:21 से सुबह 7:59 (26 अगस्त) तकशाम 6:50 – रात 9:03
8 सितंबर, मंगलवारभौम प्रदोषश्रावणकृष्ण पक्ष त्रयोदशी: दोपहर 2:43 से दोपहर 12:31 (9 सितंबर) तकशाम 6:35 – रात 8:52
24 सितंबर, गुरुवारभाद्रपदशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: रात 10:51 (23 सितंबर) से रात 11:18 तकशाम 6:15 – रात 8:38
8 अक्टूबर, गुरुवारभाद्रपदकृष्ण पक्ष त्रयोदशी: रात 11:17 (7 अक्टूबर) से रात 10:16 तकशाम 5:59 – रात 8:27
23 अक्टूबर, शुक्रवारआश्विनशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: दोपहर 2:36 से दोपहर 1:37 (24 अक्टूबर) तकशाम 5:44 – रात 8:16
6 नवंबर, शुक्रवारसाथ में: धनतेरसआश्विनकृष्ण पक्ष त्रयोदशी: सुबह 10:31 से सुबह 10:48 (7 नवंबर) तकशाम 5:32 – रात 8:09
22 नवंबर, रविवारकार्तिकशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: सुबह 4:57 से रात 2:37 (23 नवंबर) तकशाम 5:25 – रात 8:06
6 दिसंबर, रविवारकार्तिककृष्ण पक्ष त्रयोदशी: रात 12:52 से रात 2:22 (7 दिसंबर) तकशाम 5:24 – रात 8:07
21 दिसंबर, सोमवारसोम प्रदोषमार्गशीर्षशुक्ल पक्ष त्रयोदशी: शाम 5:36 से दोपहर 2:24 (22 दिसंबर) तकशाम 5:36 – रात 8:13

समय शहर के अनुसार बदलते हैं। यहां दिए सभी समय नई दिल्ली के सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय पर आधारित हैं; दूसरे शहर में कुछ मिनट और कभी-कभी तिथि भी बदल सकती है। तिथियां द्रिक पंचांग की स्मार्त (सामान्य) गणना से मेल खाती हैं। अपने शहर के लिए पंचांग देखें।

प्रदोष व्रत क्या है और कैसे मनाई जाती है

प्रदोष व्रत भगवान शिव का व्रत है, जो दोनों पक्षों की त्रयोदशी (13वीं तिथि) को रखा जाता है - यानी महीने में दो बार। प्रदोष काल सूर्यास्त के ठीक बाद का संध्या-समय है, जब शिव जी सबसे प्रसन्न माने जाते हैं। भक्त दिन भर व्रत रखते हैं, स्नान करते हैं और प्रदोष काल में शिव पूजा करते हैं: जल, दूध और बिल्वपत्र से अभिषेक, दीपक, प्रदोष स्तोत्र या शिव चालीसा। पूजा के बाद व्रत खोला जाता है।

सोमवार का प्रदोष सोम प्रदोष, मंगलवार का भौम प्रदोष और शनिवार का शनि प्रदोष कहलाता है; शनि प्रदोष को विशेष शक्तिशाली माना जाता है।

तिथि का नियम

शुक्ल त्रयोदशी: प्रदोष व्यापिनी तिथि.

तारीख शाम से तय होती है, सूर्योदय से नहीं: व्रत उस दिन होता है जब सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में त्रयोदशी चल रही हो, इसलिए दोपहर में शुरू होकर अगली दोपहर तक रहने वाली त्रयोदशी का व्रत पहले दिन होता है। यदि तिथि दो शामों को प्रदोष काल को छूए तो पहली शाम ली जाती है। तालिका में पूजा का समय नई दिल्ली के सूर्यास्त से शुरू होता है, इसलिए यह साल भर और शहर-शहर बदलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में प्रदोष व्रत की तिथियां कौन-सी हैं?

2026 में प्रदोष व्रत की 25 तिथियां हैं (नई दिल्ली): 1 जनवरी, गुरुवार; 16 जनवरी, शुक्रवार; 30 जनवरी, शुक्रवार; 14 फ़रवरी, शनिवार; 1 मार्च, रविवार; 16 मार्च, सोमवार; 30 मार्च, सोमवार; 15 अप्रैल, बुधवार; 28 अप्रैल, मंगलवार; 14 मई, गुरुवार; 28 मई, गुरुवार; 12 जून, शुक्रवार; 27 जून, शनिवार; 12 जुलाई, रविवार; 26 जुलाई, रविवार; 10 अगस्त, सोमवार; 25 अगस्त, मंगलवार; 8 सितंबर, मंगलवार; 24 सितंबर, गुरुवार; 8 अक्टूबर, गुरुवार; 23 अक्टूबर, शुक्रवार; 6 नवंबर, शुक्रवार; 22 नवंबर, रविवार; 6 दिसंबर, रविवार; 21 दिसंबर, सोमवार।

प्रदोष व्रत की अगली तिथि कब है?

प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को है (कृष्ण पक्ष त्रयोदशी: रात 11:17 (7 अक्टूबर) से रात 10:16 तक; प्रदोष पूजा: शाम 5:59 – रात 8:27)।

प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर को प्रदोष पूजा क्या है?

नई दिल्ली के लिए - कृष्ण पक्ष त्रयोदशी: रात 11:17 (7 अक्टूबर) से रात 10:16 तक; प्रदोष पूजा: शाम 5:59 – रात 8:27। समय शहर के अनुसार कुछ मिनट बदलता है; अपने शहर के लिए पंचांग देखें।

प्रदोष व्रत की तारीख कैसे तय होती है?

तारीख इस नियम से तय होती है: शुक्ल त्रयोदशी: प्रदोष व्यापिनी तिथि। 2026 में इससे 25 तिथियां बनती हैं (नई दिल्ली)।

अपने शहर का पंचांग देखें — मुफ़्त

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