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आर्द्रा नक्षत्र

Ardra Nakshatra

आज का नक्षत्र (नई दिल्ली में सूर्योदय के समय) आश्लेषा है। नक्षत्र का समाप्ति-समय, तिथि और राहु काल आज के पंचांग में देखें।

क्रम27 में से 6वाँ
अंश (निरयण)6°40′ मिथुन – 20°00′ मिथुन
राशिमिथुन
स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)राहु महादशा 18 वर्ष
देवतारुद्र
प्रतीकअश्रुबिंदु / हीरा
गणमनुष्य
योनिश्वान (कुत्ता) स्त्री
नाड़ीआदि वात
वर्ण (राशि से, गुण मिलान में)शूद्र
नामाक्षरकु घ ङ छ

स्वभाव

आर्द्रा नक्षत्र के देवता रुद्र हैं — शिव का तूफ़ानी रूप — और इसका प्रतीक अश्रुबिंदु या हीरा है। जैसे तूफ़ान हवा को साफ़ कर वर्षा लाता है, वैसे ही इस नक्षत्र में चंद्रमा वाले लोगों में प्रायः तेज़, खोजी बुद्धि और चीज़ों के भीतर का सत्य देखने की क्षमता होती है। वे गहराई से महसूस करते हैं और परिवर्तन से नहीं डरते। परंपरा आर्द्रा को कठिनाई के बाद नवीनीकरण से जोड़ती है, इसलिए शोध, तकनीक, लेखन, परामर्श और समस्या-समाधान इसके अनुकूल हैं। इसका वरदान सच्चाई और तीक्ष्ण बुद्धि है; इसकी सीख है भावनाओं को वर्षा की तरह बह जाने देना, ताकि धरती और हरी हो।

ये पारंपरिक प्रवृत्तियाँ हैं, निर्णय नहीं। आपकी पूरी कुंडली — लग्न, ग्रह और दशा — व्यक्तिगत चित्र देती है।

चार चरण और नामाक्षर

चरणअंशराशिनामाक्षर
16°40′ मिथुन – 10°00′ मिथुनमिथुनकु Ku
210°00′ मिथुन – 13°20′ मिथुनमिथुनघ Gha
313°20′ मिथुन – 16°40′ मिथुनमिथुनङ Nga
416°40′ मिथुन – 20°00′ मिथुनमिथुनछ Chha

परंपरा में बच्चे का नाम जन्म नक्षत्र के चरण के अक्षर से रखा जाता है (नामाक्षर)। अक्षर ड्रिक पंचांग में प्रकाशित स्वर-सिद्धांत की 108 चरण-अक्षरों की सूची (अवकहड़ा चक्र) के अनुसार हैं।

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