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शतभिषा नक्षत्र

Shatabhisha Nakshatra

आज का नक्षत्र (नई दिल्ली में सूर्योदय के समय) आश्लेषा है। नक्षत्र का समाप्ति-समय, तिथि और राहु काल आज के पंचांग में देखें।

क्रम27 में से 24वाँ
अंश (निरयण)6°40′ कुंभ – 20°00′ कुंभ
राशिकुंभ
स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)राहु महादशा 18 वर्ष
देवतावरुण देव
प्रतीकरिक्त वृत्त
गणराक्षस
योनिअश्व (घोड़ा) स्त्री
नाड़ीआदि वात
वर्ण (राशि से, गुण मिलान में)शूद्र
नामाक्षरगो सा सी सू

स्वभाव

शतभिषा नक्षत्र के देवता जल और सत्य के स्वामी वरुण देव हैं और इसका प्रतीक रिक्त वृत्त है। इसके नाम का अर्थ है "सौ वैद्य", और इसमें चंद्रमा वाले लोग प्रायः स्वतंत्र विचारक, एकांतप्रिय, सत्यवादी और चीज़ों के वास्तविक रहस्य को समझने के इच्छुक होते हैं। वे ऐसे पैटर्न देख लेते हैं जो दूसरों से छूट जाते हैं। परंपरा शतभिषा को उपचार और छिपे सत्य की खोज से जोड़ती है, इसलिए चिकित्सा, शोध, विज्ञान, तकनीक, खगोल और वैकल्पिक उपचार इसके अनुकूल हैं। इसका वरदान स्पष्ट, मौलिक अंतर्दृष्टि है; इसकी सीख है दूसरों को भी उस वृत्त में आने देना और अपनी समझ स्नेह से बाँटना।

ये पारंपरिक प्रवृत्तियाँ हैं, निर्णय नहीं। आपकी पूरी कुंडली — लग्न, ग्रह और दशा — व्यक्तिगत चित्र देती है।

चार चरण और नामाक्षर

चरणअंशराशिनामाक्षर
16°40′ कुंभ – 10°00′ कुंभकुंभगो Go
210°00′ कुंभ – 13°20′ कुंभकुंभसा Sa
313°20′ कुंभ – 16°40′ कुंभकुंभसी Si
416°40′ कुंभ – 20°00′ कुंभकुंभसू Su

परंपरा में बच्चे का नाम जन्म नक्षत्र के चरण के अक्षर से रखा जाता है (नामाक्षर)। अक्षर ड्रिक पंचांग में प्रकाशित स्वर-सिद्धांत की 108 चरण-अक्षरों की सूची (अवकहड़ा चक्र) के अनुसार हैं।

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