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रोहिणी नक्षत्र

Rohini Nakshatra

आज का नक्षत्र (नई दिल्ली में सूर्योदय के समय) आश्लेषा है। नक्षत्र का समाप्ति-समय, तिथि और राहु काल आज के पंचांग में देखें।

क्रम27 में से 4वाँ
अंश (निरयण)10°00′ वृषभ – 23°20′ वृषभ
राशिवृषभ
स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)चंद्र महादशा 10 वर्ष
देवताब्रह्मा (प्रजापति)
प्रतीकरथ / बैलगाड़ी
गणमनुष्य
योनिसर्प पुरुष
नाड़ीअंत्य कफ
वर्ण (राशि से, गुण मिलान में)वैश्य
नामाक्षरओ वा वी वु

स्वभाव

रोहिणी नक्षत्र के देवता सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हैं और इसका प्रतीक रथ या बैलगाड़ी है। इसे चंद्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र कहा गया है, और इसमें चंद्रमा वाले लोग प्रायः स्नेही, आकर्षक, कलाप्रिय और सुख-सौंदर्य के प्रेमी होते हैं। उनमें चीज़ों को बढ़ाने का गुण होता है — बाग़, घर, व्यापार और रिश्ते, सब उनके हाथ में फलते-फूलते हैं। परंपरा रोहिणी को उर्वरता, समृद्धि और स्थिर प्रगति से जोड़ती है, इसलिए कृषि, कला, डिज़ाइन, भोजन और आतिथ्य इसके अनुकूल हैं। इसका स्वभाव कोमल और स्थिर है; इसकी सीख है सुंदरता का आनंद लेना, पर उससे बहुत कसकर न बँधना।

ये पारंपरिक प्रवृत्तियाँ हैं, निर्णय नहीं। आपकी पूरी कुंडली — लग्न, ग्रह और दशा — व्यक्तिगत चित्र देती है।

चार चरण और नामाक्षर

चरणअंशराशिनामाक्षर
110°00′ वृषभ – 13°20′ वृषभवृषभओ O
213°20′ वृषभ – 16°40′ वृषभवृषभवा Va
316°40′ वृषभ – 20°00′ वृषभवृषभवी Vi
420°00′ वृषभ – 23°20′ वृषभवृषभवु Vu

परंपरा में बच्चे का नाम जन्म नक्षत्र के चरण के अक्षर से रखा जाता है (नामाक्षर)। अक्षर ड्रिक पंचांग में प्रकाशित स्वर-सिद्धांत की 108 चरण-अक्षरों की सूची (अवकहड़ा चक्र) के अनुसार हैं।

अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ — जानें आपका जन्म नक्षत्र और चंद्र राशि

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