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मृगशिरा नक्षत्र

Mrigashira Nakshatra

आज का नक्षत्र (नई दिल्ली में सूर्योदय के समय) आश्लेषा है। नक्षत्र का समाप्ति-समय, तिथि और राहु काल आज के पंचांग में देखें।

क्रम27 में से 5वाँ
अंश (निरयण)23°20′ वृषभ – 6°40′ मिथुन
राशिवृषभ, मिथुन
स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)मंगल महादशा 7 वर्ष
देवतासोम (चंद्र देव)
प्रतीकमृग का मुख
गणदेव
योनिसर्प स्त्री
नाड़ीमध्य पित्त
वर्ण (राशि से, गुण मिलान में)वैश्य, शूद्र
नामाक्षरवे वो का की

स्वभाव

मृगशिरा नक्षत्र के देवता सोम (चंद्र) हैं और इसका प्रतीक मृग का मुख है — वह हिरण जो सदा सजग, जिज्ञासु और खोज में रहता है। इस नक्षत्र में चंद्रमा वाले लोग प्रायः कोमल, जिज्ञासु और पढ़ने, घूमने व बातचीत के शौक़ीन होते हैं। उन्हें नए विचारों और स्थानों को जानना अच्छा लगता है और वे प्रश्न पूछना कम ही छोड़ते हैं। परंपरा मृगशिरा को खोजी का नक्षत्र मानती है, इसलिए शोध, लेखन, शिक्षण, व्यापार और जिज्ञासा को पुरस्कृत करने वाले काम इसके अनुकूल हैं। इसका आकर्षण हल्का और मैत्रीपूर्ण मन है; इसकी सीख है जो मिल गया उस पर टिकना, ताकि खोज बेचैनी न बने।

ये पारंपरिक प्रवृत्तियाँ हैं, निर्णय नहीं। आपकी पूरी कुंडली — लग्न, ग्रह और दशा — व्यक्तिगत चित्र देती है।

चार चरण और नामाक्षर

चरणअंशराशिनामाक्षर
123°20′ वृषभ – 26°40′ वृषभवृषभवे Ve
226°40′ वृषभ – 30°00′ वृषभवृषभवो Vo
30°00′ मिथुन – 3°20′ मिथुनमिथुनका Ka
43°20′ मिथुन – 6°40′ मिथुनमिथुनकी Ki

परंपरा में बच्चे का नाम जन्म नक्षत्र के चरण के अक्षर से रखा जाता है (नामाक्षर)। अक्षर ड्रिक पंचांग में प्रकाशित स्वर-सिद्धांत की 108 चरण-अक्षरों की सूची (अवकहड़ा चक्र) के अनुसार हैं।

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