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विशाखा नक्षत्र

Vishakha Nakshatra

आज का नक्षत्र (नई दिल्ली में सूर्योदय के समय) आश्लेषा है। नक्षत्र का समाप्ति-समय, तिथि और राहु काल आज के पंचांग में देखें।

क्रम27 में से 16वाँ
अंश (निरयण)20°00′ तुला – 3°20′ वृश्चिक
राशितुला, वृश्चिक
स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)गुरु महादशा 16 वर्ष
देवताइन्द्र और अग्नि (इन्द्राग्नि)
प्रतीकतोरण द्वार
गणराक्षस
योनिव्याघ्र (बाघ) पुरुष
नाड़ीअंत्य कफ
वर्ण (राशि से, गुण मिलान में)शूद्र, ब्राह्मण
नामाक्षरती तू ते तो

स्वभाव

विशाखा नक्षत्र के देवता इन्द्र और अग्नि (इन्द्राग्नि) हैं और इसका प्रतीक पत्तों से सजा तोरण द्वार है। इस नक्षत्र में चंद्रमा वाले लोग प्रायः उद्देश्यपूर्ण, महत्वाकांक्षी और अपने तय किए लक्ष्य तक पहुँचने के लिए दृढ़ होते हैं। उनमें ऊर्जा, विश्वास और लंबी राह पर चलते रहने का धैर्य होता है। परंपरा विशाखा को उद्देश्य का नक्षत्र कहती है, इसलिए नेतृत्व, शोध, राजनीति, बिक्री, शिक्षण और कोई भी दीर्घकालीन लक्ष्य इसके अनुकूल है। इसका वरदान एकाग्रता और दूसरों को साझा लक्ष्य की ओर प्रेरित करने की क्षमता है; इसकी सीख है केवल अंत के तोरण का नहीं, पूरी यात्रा का आनंद लेना।

ये पारंपरिक प्रवृत्तियाँ हैं, निर्णय नहीं। आपकी पूरी कुंडली — लग्न, ग्रह और दशा — व्यक्तिगत चित्र देती है।

चार चरण और नामाक्षर

चरणअंशराशिनामाक्षर
120°00′ तुला – 23°20′ तुलातुलाती Ti
223°20′ तुला – 26°40′ तुलातुलातू Tu
326°40′ तुला – 30°00′ तुलातुलाते Te
40°00′ वृश्चिक – 3°20′ वृश्चिकवृश्चिकतो To

परंपरा में बच्चे का नाम जन्म नक्षत्र के चरण के अक्षर से रखा जाता है (नामाक्षर)। अक्षर ड्रिक पंचांग में प्रकाशित स्वर-सिद्धांत की 108 चरण-अक्षरों की सूची (अवकहड़ा चक्र) के अनुसार हैं।

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