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स्वाति नक्षत्र

Swati Nakshatra

आज का नक्षत्र (नई दिल्ली में सूर्योदय के समय) आश्लेषा है। नक्षत्र का समाप्ति-समय, तिथि और राहु काल आज के पंचांग में देखें।

क्रम27 में से 15वाँ
अंश (निरयण)6°40′ तुला – 20°00′ तुला
राशितुला
स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)राहु महादशा 18 वर्ष
देवतावायु देव
प्रतीकहवा में लहराता अंकुर
गणदेव
योनिमहिष (भैंस) पुरुष
नाड़ीअंत्य कफ
वर्ण (राशि से, गुण मिलान में)शूद्र
नामाक्षररू रे रो ता

स्वभाव

स्वाति नक्षत्र के देवता वायु देव हैं और इसका प्रतीक हवा में लहराता अंकुर है — लचीला, स्वतंत्र और टूटे बिना झुकने वाला। इस नक्षत्र में चंद्रमा वाले लोग प्रायः स्वतंत्रता, न्याय और अपने ढंग से काम करने को महत्व देते हैं। वे सामान्यतः कूटनीतिक, शिष्ट और व्यापार व बातचीत में कुशल होते हैं। परंपरा स्वाति को व्यापार, यात्रा और आत्मनिर्भरता से जोड़ती है, इसलिए वाणिज्य, क़ानून, कूटनीति, संचार और स्वतंत्र काम इसके अनुकूल हैं। इसका वरदान अनुकूलन क्षमता और कोमल, संतुलित व्यवहार है; इसकी सीख है जड़ें जमाना, ताकि नन्हा अंकुर मज़बूत वृक्ष बन सके।

ये पारंपरिक प्रवृत्तियाँ हैं, निर्णय नहीं। आपकी पूरी कुंडली — लग्न, ग्रह और दशा — व्यक्तिगत चित्र देती है।

चार चरण और नामाक्षर

चरणअंशराशिनामाक्षर
16°40′ तुला – 10°00′ तुलातुलारू Ru
210°00′ तुला – 13°20′ तुलातुलारे Re
313°20′ तुला – 16°40′ तुलातुलारो Ro
416°40′ तुला – 20°00′ तुलातुलाता Ta

परंपरा में बच्चे का नाम जन्म नक्षत्र के चरण के अक्षर से रखा जाता है (नामाक्षर)। अक्षर ड्रिक पंचांग में प्रकाशित स्वर-सिद्धांत की 108 चरण-अक्षरों की सूची (अवकहड़ा चक्र) के अनुसार हैं।

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