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श्रवण नक्षत्र

Shravana Nakshatra

आज का नक्षत्र (नई दिल्ली में सूर्योदय के समय) आश्लेषा है। नक्षत्र का समाप्ति-समय, तिथि और राहु काल आज के पंचांग में देखें।

क्रम27 में से 22वाँ
अंश (निरयण)10°00′ मकर – 23°20′ मकर
राशिमकर
स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)चंद्र महादशा 10 वर्ष
देवताभगवान विष्णु
प्रतीककान / तीन पदचिह्न
गणदेव
योनिवानर (बंदर) स्त्री
नाड़ीअंत्य कफ
वर्ण (राशि से, गुण मिलान में)वैश्य
नामाक्षरखी खू खे खो

स्वभाव

श्रवण नक्षत्र के देवता पालनकर्ता भगवान विष्णु हैं और इसका प्रतीक कान या तीन पदचिह्न है। इसके नाम का अर्थ है "सुनना", और इसमें चंद्रमा वाले लोग प्रायः अच्छे श्रोता, सीखने के उत्सुक और ज्ञान व परंपरा के संरक्षक होते हैं। वे सुनकर सीखते हैं और सीखा हुआ आगे बाँटते हैं। परंपरा श्रवण को अध्ययन से मिले ज्ञान और लोगों को जोड़ने से जोड़ती है, इसलिए शिक्षण, परामर्श, मीडिया, भाषाएँ, संगीत और यात्रा इसके अनुकूल हैं। इसका वरदान ध्यान से समझना और उपयोगी बनने की इच्छा है; इसकी सीख है अपनी भीतरी आवाज़ को भी उतने ही ध्यान से सुनना जितना दूसरों को।

ये पारंपरिक प्रवृत्तियाँ हैं, निर्णय नहीं। आपकी पूरी कुंडली — लग्न, ग्रह और दशा — व्यक्तिगत चित्र देती है।

चार चरण और नामाक्षर

चरणअंशराशिनामाक्षर
110°00′ मकर – 13°20′ मकरमकरखी Khi
213°20′ मकर – 16°40′ मकरमकरखू Khu
316°40′ मकर – 20°00′ मकरमकरखे Khe
420°00′ मकर – 23°20′ मकरमकरखो Kho

परंपरा में बच्चे का नाम जन्म नक्षत्र के चरण के अक्षर से रखा जाता है (नामाक्षर)। अक्षर ड्रिक पंचांग में प्रकाशित स्वर-सिद्धांत की 108 चरण-अक्षरों की सूची (अवकहड़ा चक्र) के अनुसार हैं।

अपनी मुफ़्त कुंडली बनाएँ — जानें आपका जन्म नक्षत्र और चंद्र राशि

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