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धनिष्ठा नक्षत्र

Dhanishta Nakshatra

आज का नक्षत्र (नई दिल्ली में सूर्योदय के समय) आश्लेषा है। नक्षत्र का समाप्ति-समय, तिथि और राहु काल आज के पंचांग में देखें।

क्रम27 में से 23वाँ
अंश (निरयण)23°20′ मकर – 6°40′ कुंभ
राशिमकर, कुंभ
स्वामी ग्रह (विंशोत्तरी)मंगल महादशा 7 वर्ष
देवताअष्ट वसु
प्रतीकमृदंग (ढोल)
गणराक्षस
योनिसिंह (शेर) स्त्री
नाड़ीमध्य पित्त
वर्ण (राशि से, गुण मिलान में)वैश्य, शूद्र
नामाक्षरगा गी गु गे

स्वभाव

धनिष्ठा नक्षत्र के देवता समृद्धि के देव अष्ट वसु हैं और इसका प्रतीक मृदंग (ढोल) है। इसके नाम का अर्थ है "सबसे धनवान", और इसमें चंद्रमा वाले लोगों में प्रायः लय, ऊर्जा और संगीत, नृत्य या टीम-कार्य की प्रतिभा होती है। वे उदार, मिलनसार और समूह को साथ लेकर चलने वाले होते हैं। परंपरा धनिष्ठा को समृद्धि और ध्वनि से जोड़ती है, इसलिए संगीत, प्रदर्शन-कला, खेल, संपत्ति, वित्त और सामुदायिक कार्य इसके अनुकूल हैं। इसका वरदान वह ताल देना है जिस पर दूसरे चलें; इसकी सीख है बजाने के साथ सुनना भी, ताकि दूसरों की लय के लिए भी जगह रहे।

ये पारंपरिक प्रवृत्तियाँ हैं, निर्णय नहीं। आपकी पूरी कुंडली — लग्न, ग्रह और दशा — व्यक्तिगत चित्र देती है।

चार चरण और नामाक्षर

चरणअंशराशिनामाक्षर
123°20′ मकर – 26°40′ मकरमकरगा Ga
226°40′ मकर – 30°00′ मकरमकरगी Gi
30°00′ कुंभ – 3°20′ कुंभकुंभगु Gu
43°20′ कुंभ – 6°40′ कुंभकुंभगे Ge

परंपरा में बच्चे का नाम जन्म नक्षत्र के चरण के अक्षर से रखा जाता है (नामाक्षर)। अक्षर ड्रिक पंचांग में प्रकाशित स्वर-सिद्धांत की 108 चरण-अक्षरों की सूची (अवकहड़ा चक्र) के अनुसार हैं।

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